26 જૂન
कुछ चीजें दूर से बहुत सुन्दर लगती है ! जैसे
राजनीती, फिल्म, पत्रकारिता, क्रिकेट आदि आदि ! इन क्षेत्रों से जुड़े लोग समाज में
आकर्षण का केंद्र होते हैं ! समाज में इन लोगों से अच्छे सम्बन्ध बनाना बहुत लोग
चाहते हैं ! क्योंकि सामान्यजन इन चेहरों को प्रतिदिन टीवी एवं समाचारपत्रों में
देखता है! कभी-कभी तो इनकी एक झलक पाकर लोग अपार सुख की अनुभूति करते हैं! सौभाग्य
से किसी ने उनके साथ फोटो खिचवा ली तो क्या कहने ! इस चाहत में कभी कभी शायद वो ये
भूल जाते हैं कि जो चीज उन्हें आकर्षित कर रही है, वह उतनी अच्छी नहीं है जितनी दिख
रही है ! ये ठीक वैसे ही है, जैसे मंच पर गरीबों के लिए भाषण देने वाला नेता, जरूरी
नहीं कि गरीबों के हित कि बात सोचता हो!
आकर्षण से जुड़े इन क्षेत्रों में जहाँ धन का
व्यव अधिक होता है वहीं समाज में भरपूर प्रतिष्ठा भी मिलती है ! इन क्षेत्रों में
सभी लोग बुरे होते हैं ये कहना गलत होगा लेकिन आम आदमी के मानस की समझ रखने वाले कम
ही मिलते हैं ! ऐसे समय में व्यक्ति को आकर्षण के जाल में फ़सने के बजाये उसके सत्य
पर दृष्टि रखते हुए अपने विवेक से कार्य करना चाहिए ! मैंने इन क्षेत्रों को ज्यादा
नहीं जाना है लेकिन जितना जाना है उस आधार पर कह सकता हूँ कि इन क्षेत्रों में भ्रम
और आकर्षण कि भरमार है!
मैं इस कडवे सच को जानता हूँ कि आम आदमी अपने से
बड़ों (संपत्ति में) की कितनी ही नक़ल कर ले लेकिन उसे अपनी सच्चाई नहीं भुलनी
चाहिए ! आकर्षण और भ्रम अस्थायी होता है ! जो लोग बड़े होने का भ्रम पाले हैं, शायद
वो अपने मन को बहलाने कि कोशिश कर रहे हैं ! सामान्य नियम तो ये है कि योग्यता
दिखाओ, काम करो और पैसे लो पर कुछ जगह पहली शर्त होती है अपने संपर्क बनाओ बाकि
बातें तो होती रहेंगी! कुछ शक्तिशाली लोग यहाँ दूसरे के शोषण से ही अपनी तरक्की
समझते हैं ! शक्तिसंपन्न व्यक्ति को अभिमान होने कि संभावना ज्यादा होती है!
कुछ लोग कम काम करने को अपनी प्रतिष्ठा का विषय
मानते हैं! जैसे जहाँ पर वो साईकिल से जा सकते हैं वहां भी उन्हें 4 चक्का की गाड़ी
ही चाहिए! उन्हें डर लगता है कि कहीं किसी ने उन्हें साईकिल पर देख लिया तो शायद
उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है! कुछ लोग बहुत योग्य होने के बावजूद कम काम करने
को अपनी प्रतिष्ठा मानते हैं लेकिन जब यही लोग अन्य देशों में जाते हैं तो अच्छा
काम करते हैं क्योंकि वहां अनचाहे ही सही उन्हें काम करना पड़ता है ! शोषण तो हर
तरफ है चाहे वो सामाजिक, आर्थिक , राजनैतिक या बहुराष्ट्रीय कंपनियां हो ! लेकिन इस
शोषण से डरने कि आवश्यकता नहीं है ! यदि आप एक कर्मयोद्धा हो तो उसका सामना करने
के लिए आपको सदैव तैयार रहना चाहिए!
जैसे हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती है वैसे
ही हर चमकदार क्षेत्र अच्छा होगा, यह जरूरी नहीं है ! गुलाब के साथ कांटे और कमल के
साथ कीचड होना स्वाभाविक ही है ! इन्हें अपनी बुद्धि और विवेक के आधार पर ही परखना
पड़ेगा! दुनिया में सब लोग बुरे नहीं है! इस विश्वास को कायम रखना ही चाहिए! जिन
क्षेत्रों में आकर्षण है उन क्षेत्रों में काम करते हुए याद रखना चाहिए कि वहां
सफलता से जितना आकर्षण पैदा होता है उतनी असफलता से त्रासदी भी होती हैं !
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